पुरी (ओडिशा), —
पुरी की पावन धरती पर आज आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा भव्यता के साथ प्रारंभ हुई। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने पुरी धाम में उपस्थित होकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन किए और रथ खींचने का पुण्य अर्जित किया।
🌟 रथ यात्रा का शुभारंभ
सुबह मंगला आरती और विशेष पूजा-अर्चना के बाद तीनों रथ —
✅ नंदीघोष (जगन्नाथ जी का रथ)
✅ तालध्वज (बलभद्र जी का रथ)
✅ दर्पदलन / पद्मध्वज (सुभद्रा जी का रथ)
मंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर रवाना हुए। श्रद्धालुओं ने “जय जगन्नाथ” और “हरे कृष्ण हरे राम” के गगनभेदी जयकारों के बीच रथों को खींचा।
🌈 इस वर्ष की खास बातें
👉 सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम: प्रशासन ने करीब 10,000 पुलिसकर्मियों और ड्रोन कैमरों की मदद से सुरक्षा पुख्ता की।
👉 पर्यावरण जागरूकता: इस बार रथ यात्रा को प्लास्टिक-मुक्त रखने की पहल की गई।
👉 विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी: अमेरिका, रूस, जापान और ब्रिटेन से भी हजारों श्रद्धालु इस महायात्रा में शामिल हुए।
📌 श्रद्धा और समरसता का प्रतीक
रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज की एकता और भाईचारे का प्रतीक है। जाति-धर्म से परे सभी लोग मिलकर रथ खींचते हैं और भगवान के सान्निध्य का लाभ उठाते हैं।
पुरी नगर इन दिनों आस्था, रंग-बिरंगे परिधानों और भक्ति रस से सराबोर हो उठा है।
जगन्नाथ रथ यात्रा: आस्था, परंपरा और उल्लास का महापर्व
भारत की पवित्र भूमि पर कई पर्व और उत्सव होते हैं, परंतु उड़ीसा (अब ओडिशा) के पुरी नगर में मनाया जाने वाला जगन्नाथ रथ यात्रा अपने आप में अनूठा और अद्भुत है। यह उत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि कला, संस्कृति और जनआस्था का अद्वितीय संगम भी प्रस्तुत करता है।
रथ यात्रा का महत्व
जगन्नाथ रथ यात्रा हर वर्ष आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने मंदिर से निकलकर गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं। भक्तजन भगवान के इन विशाल रथों को रस्सियों से खींचते हैं और इस शुभ कार्य को करने को अपना सौभाग्य मानते हैं।
रथों का स्वरूप
तीनों रथों का निर्माण हर वर्ष नए सिरे से किया जाता है। ये रथ लकड़ी से बनाए जाते हैं और इन पर आकर्षक चित्रकारी तथा झंडे-पताकाएं सजाई जाती हैं। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष कहलाता है, बलभद्र का रथ तालध्वज और सुभद्रा का रथ पद्मध्वज कहलाता है।
रथ यात्रा की खासियत
- सामाजिक समरसता: इस महायात्रा में जाति, धर्म और वर्ग के बंधन टूट जाते हैं। सभी भक्त समान भाव से रथ खींचते हैं।
- विश्वव्यापी आकर्षण: न केवल भारत से बल्कि विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु पुरी आते हैं और इस अद्भुत यात्रा का हिस्सा बनते हैं।
- लोक कलाओं का संगम: रथों की सजावट, रथ निर्माण की कारीगरी और यात्रा के दौरान गाए जाने वाले गीत लोक कला की जीवंत मिसाल हैं।
आस्था और विज्ञान का मेल
रथ यात्रा के दौरान जो विशाल जनसमूह एक साथ रथ खींचता है, वह हमें सहकार और एकता का अद्भुत संदेश देता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि ईश्वर तक पहुंचने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
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